Monday, 9 January 2017

नवरोज 'Pateti Festival Essay In Hindi'

नवरोज Pateti Festival Essay In Hindi




Hi Friends, जिस तरह हिन्दू और मुसलमान अपने विभिन्न पर्व हर्षोल्लास के साथ मानते हैं, ठीक उसी तरह पारसी समुदाय के लोग अपना नया साल यानि की Pateti Festival प्रत्येक वर्ष 19 अगस्त को मनाते हैं.

पारसी समुदाय के इस नववर्ष को 'नवरोज' भी कहते हैं जिसे वे सभी काफी आस्था तथा संगम के साथ मनाते हैं. नवरोज ( Pateti Festival ) एक ऐसा त्योहार जिसका इंतजार पारसी समुदाय साल भर करते हैं और इस दिन वे सभी अपने परिवार के साथ मिलजुलकर काफी हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं.

करीब तीन हजार साल पहले ईरान में शाह जमशेद ने इसी दिन सिहांसन ग्रहण किया था जिस नया दिन या नवरोज ( Pateti Festival ) के नाम से जाना जाने लगा. यह दिन जरथुस्त्र वंशियों का नए वर्ष का पहला दिन माना जाने लगा.

बजान के अनुसार हमारे भगवान प्रौफेट जरस्थ्रु का जन्म दिवस 24 अगस्त को मनाया जाता है.

नववर्ष पर खास कार्यक्रम नहीं हो पाते इस वजह से 24 अगस्त को पूजन और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता हैं.यह दिन भी हमारे पर्वों में सबसे खास होता है.

उनके नाम के कारण ही हमें जरस्थ्रुटी कहा जाता है.पारसियों के लिए यह दिन सबसे बड़ा होता है.इस अवसर पर समाज के सभी लोग पारसी धर्मशाला में इकट्ठा होकर पूजन करते हैं.

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समाज में वैसे तो कई खास मौके होते हैं, जब सब आपस में मिलकर पूजन करने के साथ खुशियां भी बांटते हैं, लेकिन मुख्यतः तीन मौके साल में सबसे खास हैं.एक खौरदाद साल, प्रौफेट जरस्थ्रु का जन्मदिवस और तीसरा 31 मार्च.

ईराक से कुछ सालों पहले आए अनुयायी 31 मार्च को भी नववर्ष मनाते हैं.नववर्ष पारसी समुदाय में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है.धर्म में इसे खौरदाद साल के नाम से जाना जाता है.

यह दिन यानी की नवरोज ( Pateti Festival ) विश्व के किस हिस्से जैसे ईरान, इराक, बहरीन, लेबनान, पाकिस्तान, ताजीकिस्तान आदि में काफी हर्षोल्लास से मनाया जाता है.

भारत में नवरोज ( Pateti Festival ) के दिन को पारसियों का नया दिन माना जाता है.

इस दिन को नवरोज ( Pateti Festival ) पारसी समुदाय के लोग राजा जमशेद की याद में मनाते हैं क्योंकि उन्होंने ही पारसी कैलेंडर के स्थापना की थी. वे लोग मानते हैं की इस दिन पूरी कायनात बनाई गयी थी.

नवरोज ( Pateti Festival ) के दिन पारसी समुदाय के लोग अपने घरों में विशेष तरह के पकवान बनाते हैं जिसमे मीठा रवा, सिवई, पुलाव, मछली तथा अन्य प्रकार के वयंजन शामिल हैं.

नवरोज ( Pateti Festival ) के दिन अपने घर में आने बाले मेहमानों का स्वागत वे सभी गुलाब के जल को छिड़ककर किया करते हैं.

पारसी समुदाय के परंपरा के अनुसार वे सभी इस दिन मेज पर पवित्र वस्तुएं रखते हैं जिसमे जरथुस्त्र की तस्बीर, मोमबती, दर्पण, अगरबत्ती, फल, फूल, चीनी, सिक्के इत्यादि शामिल होते हैं. माना जाता है की ऐसा करने से परिवार के लोगों की आयु तथा समृधि बढती है.

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नवरोज ( Pateti Festival ) के दिन पारसी समुदाय के लोग उपासना स्थलों पर जाते हैं तथा वहां पुजारी धन्यवाद देने वाली प्रार्थना करते हैं जिसे जश्न के नाम से जाना जाता है.

नवरोज ( Pateti Festival ) के दिन लोग पवित्र अग्नि को चन्दन की लकड़ी चढाते हैं और इसके बाद वे लोग एक दुसरे को नए साल का मुबारकबाद देते हैं.

वैसे तो भारत में पारसी समुदाय की आबादी काफी कम है लेकिन नवरोज ( Pateti Festival ) जैसे त्योहार के माध्यम से वे अपनी परम्पराओं को आज भी जीवित रखे हुए हैं.

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भारत एक ऐसा देश है जहाँ हर धर्म तथा जाती के लोग निवास करते हैं और सभी लोगो को सामान जगह और इज्जत दी जाती है. पारसी समुदाय का यह त्योहार नवरोज ( Pateti Festival ) की भी काफी धूम देखने को मिलती है.

1380 ईस्वी पूर्व जब ईरान में धर्म परिवर्तन की लहर चली तो कई पारसियों ने अपना धर्म परिवर्तित कर लिया, लेकिन जिन्हें यह मंजूर नहीं था वे देश छोड़कर भारत आ गए. यहां आकर उन्होंने अपने धर्म के संस्कारों को आज तक सहेजे रखा है.

सबसे खास बात ये कि समाज के लोग धर्म परिवर्तन के खिलाफ होते हैं. श्री बजान ने बताया कि पारसी समाज की लड़की किसी दूसरे धर्म में शादी कर लें तो उसे धर्म में रखा जा सकता है, लेकिन उनके पति और बच्चों को धर्म में शामिल नहीं किया जाता.

ठीक इसी तरह लड़कों के साथ भी होता है.लड़का किसी दूसरे समुदाय में शादी करता है तो उसे और उसके बच्चों को धर्म से जुड़ने की छूट है, लेकिन उनकी पत्नी को नहीं.

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